Thursday, December 12, 2019

Poetry Suraj S Mishra

हमेशा सफर में रहा,
पर कभी मंजिलों तक नहीं आया...
कश्ती भी अपनी मौजों में रही,
पर कभी साहिल पे नहीं आया...

हो गया हूं पहाड़े की तरह,
कभी गिनतियों में नहीं आया...
बना रहा एक पहेली,
पर किसी को समझ में नहीं आया...
5th Dec 19
@suraj_s_mishra

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